Admin / Sun, Apr 5, 2026 / Post views : 1
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में एक नया मोड़ आ गया है। शनिवार को ईरान ने अमेरिकी F-15E फाइटर जेट को मार गिराया। 28 फरवरी को युद्ध के शुरू होने के बाद पहली बार ईरानी क्षेत्र में अमेरिकी विमान के गिरने की पुष्टि हुई है। दो सदस्यों वाले क्रू में से एक को अमेरिकी बलों ने बचा लिया, लेकिन दूसरा सदस्य अभी लापता है। ईरानी मीडिया ने आम नागरिकों से अपील की है कि अगर वे लापता पायलट या क्रू सदस्य को जिंदा पकड़कर पुलिस या सैन्य बलों को सौंप दें तो उन्हें इनाम और बोनस दिया जाएगा। इससे अमेरिकी सेना और ईरानी नागरिकों के बीच रेस शुरू हो गई है।
लापता क्रू सदस्य को पकड़े जाने पर यह पहला मौका नहीं होगा, जब ईरान अमेरिकी कर्मियों को हिरासत में रखेगा। ईरानी सेना ने पहले भी ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की है। पकड़े गए अमेरिकियों की आंखों पर पट्टी बांध दी गई। उन्हें घुटनों पर बैठने और अपमानजनक बर्ताव का सामना करना पड़ा था। पिछली घटना 12 जनवरी 2016 की है जब 10 अमेरिकी नौसैनिक (9 पुरुष और 1 महिला) ईरानी क्षेत्रीय जल में घुस गए थे। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के सशस्त्र सदस्यों ने उन्हें बंदूक की नोक पर पकड़ लिया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी नाविकों को आंखों पर पट्टी बांध दी गई, बॉडी आर्मर उतरवाया गया और घुटनों पर बैठाकर हाथ पीछे रखने को कहा गया। पूरे समय उनकी फोटो और वीडियो खींचे गए। उन्हें फारसी द्वीप ले जाकर पूछताछ की गई और रात भर हिरासत में रखा गया। रिहाई के लिए उन्हें ईरानी लिखित माफी पढ़नी पड़ी, कैमरे के सामने खुश दिखना पड़ा और भोजन भी कराया गया था। इस तरह 15 घंटे की मुश्किलों के बाद वे सुरक्षित रिहा हो पाए थे।
साल 1979 की एक पुरानी घटना है, जो और भी गंभीर थी। उस वक्त तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर हमला हुआ था। छात्रों ने 66 अमेरिकियों को बंधक बना लिया, जिनमें से 52 को 444 दिनों तक कैद रखा गया। उन्हें 20 जनवरी 1981 को रिहा किया गया। ऐसे इतिहास से पता चलता है कि ईरान अमेरिकी कर्मियों के साथ सख्त बर्ताव करता रहा है। फिलहाल लापता पायलट की सुरक्षा चिंता का विषय है और दोनों देशों के बीच इससे तनाव चरम पर पहुंच गया है।
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